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कहीं आपके सिर दर्द और थकान का कारण हाइपोनेट्रिमिया तो नहीं - Hyponatremia in Hindi

लाइफस्टाइल में लापरवाही से कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कई बार तो लोग ऐसी समस्या से जूझते हैं, जिसका नाम शायद ही पहले कभी सुना हो। उनमें से एक समस्या हाइपोनेट्रिमिया है। यह दिक्कत किसी को भी हो सकती है। ऐसे में हाइपोनेट्रिमिया के कारण और हाइपोनेट्रिमिया का इलाज के बारे में यहां विस्तार से जानें।

सबसे पहले पढ़ते हैं हाइपोनेट्रिमिया क्या है?

हाइपोनेट्रिमिया क्या है? – What is Hyponatremia in Hindi

रक्त में सोडियम का स्तर निम्न होने को चिकित्सकिय भाषा में हाइपोनेट्रेमिया कहते हैं। सोडियम एक इलेक्ट्रोलाइट यानी खनिज है, जो ब्लड प्रेशर को मेंटेन करता है। सोडियम अधिकतर कोशिकाओं के बाहर शरीर के तरल पदार्थ में पाया जाता है। 

नसों, मांसपेशियों और शरीर के अन्य ऊतकों को भी ठीक से काम करने के लिए सोडियम की जरूरत होती है। जब कोशिकाओं के बाहर तरल पदार्थों में सोडियम की मात्रा सामान्य से कम होती है, तो स्तर को संतुलित करने के लिए पानी कोशिकाओं में चला जाता है। बहुत अधिक पानी होने के कारण कोशिकाएं फूल जाती हैं, जिसमें विशेष रूप से मस्तिष्क की कोशिकाएं प्रभावित होती हैं (1)।

एनसीबीआई (नेशनल सेंटर फॉर बायोटेक्नोलॉजी इंफॉर्मेशन) की वेबसाइट पर प्रकाशित शोध में हाइपोनेट्रिमिया को परिभाषित करते हुए बताया गया है कि शरीर में सोडियम की मात्रा <135 meq/l से कम हो, तो हाइपोनेट्रिमिया हो जाता है। हाँ, कुछ मामलों में यह मात्रा भिन्न भी हो सकती है (2)।

हाइपोनेट्रिमिया क्या है जानने के बाद हाइपोनेट्रिमिया के कारण जानेंगे।

हाइपोनेट्रिमिया के कारण – Causes of Hyponatremia in Hindi

हाइपोनेट्रिमिया के कारण शरीर में सोडियम से जुड़ी समस्या होती है। दरअसल, हाइपोनेट्रिमिया की समस्या में शरीर में सोडियम का स्तर कम हो जाता है। आइए, जानते हैं कि हाइपोनेट्रिमिया होने का कारण यानी शरीर में सोडियम कम कैसे होता है (1) (3)।

  • उल्टी आना
  • किडनी रोग 
  • हार्ट फेलियर
  • दस्त की समस्या
  • लीवर सिरोसिस
  • अधिक पसीना आना
  • मूत्र के माध्यम से सोडियम का नुकसान
  • मूत्रवर्धक दवाइओं के सेवन से पेशाब अधिक होना

आगे जानते हैं हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण।

हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण – Symptoms of Hyponatremia in Hindi

हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण कई हो सकते हैं, जिनके बारे में हम नीचे बता रहे हैं (1):

  • हाइपोनेट्रिमिया से पीड़ित व्यक्ति में भ्रम, चिड़चिड़ापन, बेचैनी जैसे लक्षण दिखाई देते हैं।
  • बेहोशी की समस्या भी हाइपोनेट्रिमिया में हो सकती है।
  • थकान महसूस हो सकती है।
  • हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण में सिरदर्द भी शामिल है।
  • भूख में कमी का एहसास हो सकती है।
  • मांसपेशियों में कमजोरी या ऐंठन की शिकायत हो सकती है।
  • मतली या फिर उल्टी भी हो सकती है।

हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण के बाद अब इसके जोखिम कारकों को जानते हैं।

हाइपोनेट्रिमिया के जोखिम कारक – Risk Factors of Hyponatremia in Hindi

हाइपोनेट्रिमिया के जोखिम कारक कई हैं, जिसके बारे में हम नीचे बता रहे हैं (4)।

  • बढ़ती उम्र के साथ पानी को बाहर निकालने की क्षमता कम हो जाती है, जिसके कारण हाइपोनेट्रिमिया का जोखिम बढ़ सकता है।
  • पुरानी बीमारियां भी हाइपोनेट्रिमिया का जोखिम कारक बन सकती हैं।
  • शरीर का वजन कम होना भी हाइपोनेट्रिमिया का जोखिम कारक माना जाता है।
  • आहार में सोडियम की मात्रा कम होना भी हाइपोनेट्रिमिया का खतरा बढ़ सकता है।
  • कुछ विशेष प्रकार की दवाएं भी हाइपोनेट्रिमिया के जोखिम को बढ़ा देती हैं।

अब जानें हाइपोनेट्रिमिया का निदान कैसे हो सकता है।

हाइपोनेट्रिमिया का निदान : Diagnosis of Hyponatremia in Hindi

हाइपोनेट्रिमिया के निदान के लिए डॉक्टर निम्नलिखित सवाल पूछ सकते हैं व खास परीक्षण की सलाह भी दे सकते हैं (1)।

  • सबसे पहले स्वास्थ्य प्रदाता शारीरिक परीक्षण कर सकते हैं। इस दौरान शारीरिक लक्षणों और अन्य बीमारियों के बारे में पूछा जा सकता है।
  • हाइपोनेट्रिमिया का पता लगाने के लिए रक्त और पेशाब के परीक्षण की सलाह दी जा सकती है
  • कुछ लैब टेस्ट जैसे कॉप्रिहेंसिव मेटाबॉलिक पैनल, ऑस्मोलैलिटी ब्लड टेस्ट, यूरिन ऑस्मोलैलिटी के लिए कह सकते हैं।
  • यूरिन सोडियम की जांच की सलाह दे सकते हैं।

निदान के बाद अब जानते हैं हाइपोनेट्रिमिया का इलाज।

हाइपोनेट्रिमिया का इलाज – Treatment of Hyponatremia in Hindi

डॉक्टर हाइपोनेट्रिमिया का इलाज जीवन शैली में कुछ बदलाव कर या फिर दवाइयों की मदद से होता है, जो प्रत्येक व्यक्ति के लिए अलग हो सकता है। आइए, नीचे जानते हैं हाइपोनेट्रिमिया का इलाज कैसे होता है (1):

  • सबसे पहले डॉक्टर शरीर में कम सोडियम के कारण का निदान और उपचार करेंगे।
  • अगर इस स्थिति का कारण कैंसर है, तो ट्यूमर को हटाने के लिए रेडिशन, कीमोथेरेपी या सर्जरी का उपयोग कर सोडियम असंतुलन को ठीक करने का प्रयास कर सकते हैं।
  • डॉक्टर नस के माध्यम से तरल पदार्थ दे सकते हैं।
  • हाइपोनेट्रिमिया का इलाज करने के लिए स्वास्थ्य प्रदाता कुछ दवाइयों का सुझाव भी दे सकते हैं।
  • आवश्यक मात्रा में पानी का सेवन करते रहने की सलाह दे सकते हैं।

अंत तक पढ़ें

लेख के आखिरी भाग में जानते हैं कि हाइपोनेट्रिमिया से बचने के उपाय क्या हैं।

हाइपोनेट्रिमिया से बचने के उपाय – Prevention Tips for Hyponatremia in Hindi

हाइपोनेट्रिमिया का इलाज बताने के बाद हम यहां हाइपोनेट्रिमिया से बचने के उपाय बता रहे हैं (1)।

  • हाइपोनेट्रिमिया से बचने के उपाय में सबसे जरूरी सोडियम लेवल कम होने वाली स्थिति का इलाज करना है।
  • यदि खेलते हैं या फिर किसी अन्य शारीरिक गतिविधि में हिस्सा लेते हैं, तो शरीर के सोडियम स्तर को संतुलित रखने के लिए स्पोर्ट्स ड्रिंक जैसे तरल पदार्थ का सेवन करें, जिनमें इलेक्ट्रोलाइट्स हों।
  • अगर किसी ऐसी दवा का सेवन कर रहे हैं, जिससे सोडियम का स्तर कम हो सकता है, तो डॉक्टर से तुरंत संपर्क करें।
  • हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण दिख रहे हों, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से इलाज कराएं।

हाइपोनेट्रिमिया को हल्के में लेकर अनदेखा न करें, क्योंकि ये गंभीर समस्या भी उत्पन्न कर सकता है। लेख में हाइपोनेट्रिमिया का इलाज भी बताया गया है, जिसे अपनाकर इस परेशानी से काफी हद तक राहत पाई जा सकती है। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

डॉक्टर से कब सलाह लें?

जब शरीर का सोडियम स्तर बहुत अधिक गिर जाता है, तो यह एक जानलेवा स्थिति भी साबित हो सकती है। अगर सोडियम का स्तर लो है, तो बिना देर किए तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें। इसके लिए हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण पर गौर करें जैसे कि भ्रम, बेहोशी, बेचैनी, भूख में कमी, थकान, आदि (1)।

क्या हाइपोनेट्रिमिया ठीक हो सकता है?

हां, बिल्कुल शरीर में सोडियम के स्तर को संतुलित कर हाइपोनेट्रिमिया को ठीक किया जा सकता है (1)। ऐसे में हाइपोनेट्रिमिया के लक्षण दिखते ही सही समय पर इलाज कराएं।

हाइपोनेट्रिमिया से कौन सा अंग सबसे अधिक प्रभावित हो सकता है?

हाइपोनेट्रिमिया में कोशिकाओं के बाहर तरल पदार्थों में सोडियम की मात्रा सामान्य से कम हो जाती है, जिसे संतुलित करने के लिए पानी कोशिकाओं में चला जाता है। इससे कोशिकाएं फूल जाती हैं। ऐसी स्थिति में विशेषरूप से मस्तिष्क की कोशिकाएं सूजन के प्रति संवेदनशील हो जाती हैं (1)।

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