पीसीओएस और बांझपन का क्या है संबंध, जानें क्या कहते हैं डॉक्टर

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (PMS) के दर्द का घरेलू इलाज - Premenstrual Syndrome Relief Tips in Hindi

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम पीरियड्स से पहले होने वाले लक्षणों को कहते हैं। यह समस्या कुछ महिलाओं को अधिक महसूस होती है, तो कुछ को कम। इस दिक्कत को कैसे दूर व कम किया जा सकता है, यह विस्तार से इस लेख में  बताया गया है।

पीएमएस के दर्द का कारण | Causes of Premenstrual Syndrome in Hindi

पीएमएस यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम, पीरियड आने से दो-तीन दिन पहले शुरू हो जाता है। इस दौरान महिलाओं को सिरदर्द, जोड़ों में दर्द, चिड़चिड़ापन, मूड में बदलाव, अवसाद, स्तन में सूजन की समस्या महसूस होने लगती है (1)।

पीएमएस का कारण  एस्‍ट्रोजन और प्रोजेस्‍टेरोन हार्मोन में होने वाले बदलाव को माना जाता है। इसके अलावा, महिलाओं के शरीर में केमिकल सेरोटोनिन के स्तर में आने वाली कमी भी इसकी एक वजह है।

कुछ मामलों में PMS सामाजिक, बायोलॉजिकल व साइकोलॉजिकल कारक से भी संबंधित हो सकता है। कई बार अधिकांश महिलाएं अपने प्रसव के वर्षों के दौरान पीएमएस के लक्षणों का अनुभव करती हैं (2)।

पीएमएस के दर्द का कारण जानने के बाद पीएमएस के दर्द के लक्षण पर चर्चा करेंगे।

पीएमएस के दर्द का लक्षण - Symptoms of Premenstrual Syndrome in Hindi

पीएमएस के लक्षण हर महिला में अलग-अलग हो सकते हैं। कुछ महिलाओं को शारीरिक लक्षण हो सकते हैं, तो कुछ को भावनात्मक या मानसिक, वहीं किसी को दोनों ही हो सकते हैं (3)।

पीएमएस के शारीरिक लक्षण

  • सूजे हुए स्तन
  • कब्ज या दस्त की समस्या
  • सूजन या गैस होने का एहसास
  • ऐंठन की शिकायत
  • सिरदर्द या पीठ दर्द की समस्या
  • खराब मूड
  • शोर या रोशनी से परेशानी

पीएमएस के भावनात्मक या मानसिक लक्षण

  • चिड़चिड़ापन
  • थकान महसूस होना
  • नींद की समस्या (बहुत अधिक या बहुत कम सोना)
  • भूख में बदलाव होना या बहुत अधिक भूख लगना
  • एकाग्रता या याददाश्त की कमी
  • तनाव या चिंता
  • अवसाद या उदासी की भावना
  • मूड में बदलाव
  • आत्महत्या के विचार आने

पीएमएस का उपचार - PMS Treatment in Hindi

पीएमएस का इलाज इसकी गंभीरता पर निर्भर करता है। अगर दिक्कत हल्की है, तो डाइट में बदलाव, एक्सरसाइज और कुछ थेरेपी काफी होती हैं। अगर समस्या गंभीर है, तो देवाओं का सहारा लेना पड़ सकता है (4)।

  • जीवनशैली में बदलाव - प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से बचाव के लिए जीवनशैली में बदलाव करना जरूरी है। इसके लिए नियमित रूप से व्यायाम, स्ट्रेस से बचाव व पर्याप्त नींद लेने की आदतों को अपने रूटीन में शामिल करें। 

    डाइट में नॉन आयली फूड को जगह दें। ज्यादा नमक वाले खाने से परहेज करें। कार्बोहाइड्रेट में ओट्स, मूसली, दाल लेना चाहिए। कैल्शियम और मैग्निशियम युक्त आहार का सेवन करें।
  • दवाइयां - पीएमएस की समस्या में हर्बल दवाई का इस्तेमाल किया जा सकता है। इसमें मूड स्विंग को कम करने के लिए फ्रूट विटास लाभकारी हो सकता है। इसके अलावा, सेलेक्टिव सेरोटोनिन रिसेप्टर्स इनहिबिटर (SSRIs) का इस्तेमाल भी पीएमएस के मनोदशा में सुधार कर सकता है। किसी भी दवाई का सेवन डॉक्टर की सलाह के बिना न करें।
  • कॉग्निटिव-बिहेवियरल थेरेपी (सीबीटी) - सीबीटी यानी टॉकिंग थेरेपी भी इसमें मददगार होता है। मरीज की स्थिति को देखते हुए डॉक्टर इसकी सलाह दे सकते हैं। सीबीटी अवसाद और चिंता के साथ-साथ बेचैनी जैसे PMS के लक्षण को दूर कर सकता है।

पीएमएस के समय होने वाले दर्द से बचाव के उपाय - Prevention Tips For Premenstrual Syndrome in Hindi

प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम से बचाव कैसे किया जा सकता है, जानने के लिए लेख में आगे बताए गए कुछ टिप्स पढ़ें (2)।

  • महीने भर पानी या जूस जैसे तरल पदार्थों का खूब सेवन करें।
  • कैफीन युक्त ठंडे पेय पदार्थ, शराब या अन्य पेय पदार्थों के सेवन से बचें।
  • थोड़ी-थोड़ी मात्रा में हर दो से तीन घंटे के अंतराल पर भोजन करें। एक बार में अधिक खाने से बचें।
  • आहार में साबुत अनाज, हरी सब्जियां और फल शामिल करें। 
  • नमक और चीनी की मात्रा को सीमित करें।
  • विटामिन बी6, कैल्शियम और मैग्नीशियम आदि युक्त भोजन खाएं। ये पोषक तत्व इस समस्या से राहत दिलाने में मदद करते हैं।
  • इसके अलावा, डेयरी उत्पादों में पाया जाने वाला ट्रिप्टोफैन भी मददगार हो सकता है।
  • महीने भर नियमित रूप से एरोबिक व्यायाम करें। यह पीएमएस के लक्षणों को कम करने में कारगर हो सकता है।
  • नींद की समस्या के लिए दवा लेने के बजाय आदतों में बदलाव लाएं।

कब लेनी चाहिए डॉक्टर की सलाह - When to Visit A Doctor

कुछ परिस्थितियों में पीएमएस से निपटने के लिए डॉक्टर से सलाह लेनी पड़ सकती है, आइए जानते हैं कब (2)

  • पीएमएस के लक्षण इतने गंभीर हैं कि  कार्य करने की क्षमता को प्रभावित हो, तो तुरंत डॉक्टर से मिलें।
  • ऐसा लगता है कि पीएमएस के दौरान खुद को या दूसरों को चोट पहुंचा सकते हैं, तो डॉक्टर से बात करें।
  • दर्द सहन नहीं हो रहा है, तो डॉक्टर से बात करें।

पीएमएस से बचने के लिए सालभर अपनी जीवनशैली पर ध्यान देना होगा और पौष्टिक आहार का सेवन सबसे महत्वपूर्ण है। पीरियड्स शुरू होने से कुछ दिन पहले पौष्टिक आहार सेवन करने से फायदा नहीं मिलेगा। आप अपनी मर्जी के फास्ट फूड और फ्राइड फूड खा सकते हैं, लेकिन सीमित मात्रा में और महीने में एक या दो दिन ही। पीरियड्स के दिन नजदीक हों, तो इन्हें लेना एकदम बंद कर दें। 

अक्सर पूछे जाने वाले सवाल

पीएमएस पीरियड्स से पहले कितने समय तक रहता है?

पीएमएस के कई लक्षण होते हैं जो कि आमतौर पर मासिक धर्म चक्र के दूसरे भाग के दौरान शुरू होते हैं और मासिक धर्म शुरू होने के 1 से 2 दिन बाद चले जाते हैं (2)।

क्या पीएमएस के दौरान गर्भवती हो सकती हैं?

हाँ, पीएसएस के दौरान महिलाएं गर्भवती हो सकती हैं (5)।

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